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भारतीय आध्यात्मिक ज्ञान, वेदान्त, योग और आत्मा-परमात्मा के गहन विषयों पर लेख एवं विचार।
5 लेख प्रकाशित
कुछ लोग गीता को वैराग्य का ग्रंथ मानते हैं, तो कुछ इसे केवल पढ़ने या सुनने से जीवन सुधर जाने की आशा रखते हैं। किन्तु यह दोनों ही दृष्टिकोण भ्रमपूर्ण हैं। गीता का वैराग्य पलायन नहीं...
आधुनिक विज्ञान भी अपनी परिभाषा में कहता है कि जिसको खण्डित न किया जा सके, वही ‘तत्व’ है। इस दृष्टि से यह परम तत्व ही वास...
मनुष्य जीवनभर इच्छाओं और भोगों में उलझा रहता है और अपने अस्तित्व, जीवन और मृत्यु के वास्तविक प्रश्नों पर विचार नहीं करता...
वैदिक विज्ञान यह स्पष्ट करता है कि सृष्टि, जीवन और चेतना को अलग-अलग करके नहीं समझा जा सकता। यह सब एक ही मूलतत्त्व की विभ...
वैदिक दृष्टिकोण के अनुसार इस ब्रह्मांड में व्याप्त प्रत्येक कण-कण के अस्तित्व का आधार “कामना” है। यही वह तत्व है, जिसके...